गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियां, लक्षण और उनसे बचने के उपाय | common summer diseases

भारत में उत्तर से लेकर दक्षिण तक गर्मी ने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दिन में बाहर का तापमान 44 – 45°C अभी होने लगा है, क्या होगा जब गर्मी अपने चरम रूप में आएगी। गर्मी की वजह से बीमारियों ने भी दस्तक देना शुरू कर दिया है ऐसे में लोग दिन में अपने घरों से निकलने में बचते नजर आ रहे हैं, क्योंकि बाहर धूप में निकलने से ज्यादा तापमान आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। तो कोशिश करें जब आवश्यकता हो तभी घर से बाहर निकलें।

अगर देखा जाय तो लगभग हर मौसम में कुछ न कुछ बीमारियां होती रहती हैं जैसे सर्दी में सर्दी जुखाम, बरसात के मौसम में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियां अपने चंगुल में जकड़ लेती हैं। वैसे ही गर्मी के इस मौसम में भी कुछ कॉमन परेशानियां होती है जिनसे हमें बचने की आवश्यकता होती है। जिनके बारे में आज हम जानकारी मुहैया कराएंगे। जिनसे सावधान रहने की नितांत आवश्यकता है। तो आइए शुरू करते है कि गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियां, लक्षण और उनसे बचने के उपाय

गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियां:

घमौरी (HEAT RASH), लक्षण:

घमौरिया अक्सर गर्मी के मौसम में ही अपना प्रभाव दिखाती है। ये बच्चे, वयस्क और बुजुर्ग में से किसी को भी हो सकती है। गर्मी के मौसम में हमारे शरीर से पसीना भी खूब निकलता रहता है जब हम धूप के संपर्क में रहें या हवा न लगने के कारण भी शरीर में पसीना होने लगता है। जब यही पसीना हमारे रोम छिद्रों के द्वारा पूरी तरीके से बाहर नहीं आ पाता, उसी से हमारे स्किन में जलन होती है और फिर ये छोटे छोटे दाने के रूप में स्किन पर दिखने लगते हैं। कुछ तो सामान्य और कुछ बड़े बड़े और कंटीले भी होते है जिनसे व्यक्ति को खुजली और जलन भी होने लगता है।

घमौरी से बचने के उपाय:

शरीर पर ऐसे वस्त्र पहने जो सूती के और पतले हों जिनसे हमारे शरीर को हवा मिलती रहे। संभवतः धूप में मेहनत वाला कार्य न करें जिससे ज्यादा पसीना निकलता हो। आप गर्मी के मौसम में हवा के लिए पंखे कूलर का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही एयरकंडीशनर का उपयोग और उत्तम रहता है। अपनी त्वचा को सुखा (Dry) रखने की कोशिश करें। फिर भी घमौरिया हो ही जाएं तो ज्यादा से ज्यादा त्वचा को हवादार माहौल में रखें और बैक्टीरिया रोधी साबुन का इस्तेमाल करें , साथ ही किसी अच्छे Brand का प्रिकली हिट पाउडर का उपयोग कर सकते है।

गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियां, लक्षण और उनसे बचने के उपाय
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लू लगने का लक्षण: (Heat Stroke)

गर्मी के मौसम में गर्म हवा चलती है और हम उसके चपेट में आ जाते है जिससे हमारे शरीर का तापमान लगभग 104°F तक पहुंच जाता है और पूरे शरीर में दर्द के साथ उल्टी भी आना शुरू हो जाता है, जिससे कमजोरी हो जाती है और ज्यादा कमजोरी होने पर व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है। वैसे तो गर्मी के बढ़ते तापमान के बीच लू लगने को हम मामूली समझ लेते है लेकिन इसमें लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है, इसीलिए इससे बच कर रहें।

लू लगने से बचने के उपाय:

गर्मी में लू से बचने के लिए कड़ी धूप यानी 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें और हल्के सूती कपड़ों का ज्यादातर इस्तेमाल करें। घर के अंदर रहे या जहां तापमान सामान्य हो वहां रहें। तरल पदार्थों (LIQUID) का भरपूर इस्तेमाल करते रहें, ज्यादातर नींबू पानी का सेवन करें। इस मौसम में खाली पेट भी घर से न निकलें अन्यथा ऐसे में डायरिया होने की ज्यादा संभावना रहती है।

धूप से त्वचा पर जलन या एलर्जी (Sunburn):

गर्मी के मौसम में सूरज की किरण अक्सर तेज ही रहती है जो हमारे शरीर के खुले हिस्सों में जैसे चेहरा, हाथ में धूप में रहने के दौरान जल से जाते है, यानी इससे त्वचा का रंग बदलकर काला हो जाता है। क्योंकि सूर्य की किरणों के साथ UV RAYS भी हमारे त्वचा से संपर्क में आ जाती हैं।और त्वचा में जलन, खुजली जैसा महसूस होने लगता है यही धूप से जलन (SUNBURN) या एलर्जी कहा जाता है।

धूप से जलन या Sunburn से कैसे बचें?

इससे बचने के लिए कोशिश करें कि जब तेज धूप हो बाहर न निकलना पड़े, अगर जाना ही पड़े तो आपके साथ में टोपी या कैप होनी चाहिए। पूरे आस्तीन की शर्ट जरूर पहनें और सम्भवतः छाता का इस्तेमाल जरूर करें। काला चश्मा भी पहन सकते है। अगर आप चाहें तो Suncream का उपयोग किया जाना भी सनबर्न से बचाने में भूमिका निभाता है।

फूड प्वाइजनिंग कैसे होता है? ( FOOD Poisoning):

फूड प्वाइजनिंग यानी विषाक्तता का मुख्य कारण ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जो गर्मी के मौसम में भी खुले, दूषित या बासी हो जाते हैं। जिसका सेवन गलती से भी कर लेने से व्यक्ति फूड प्वाइजनिंग का शिकार बन जाता है। गर्मी के मौसम में ये एक कॉमन समस्या है। व्यक्ति द्वारा दूषित, बासी और बैक्टीरिया से मिश्रित भोजन या जल खाने पीने से 2-3 घंटे में ही उल्टी, मितली और दस्त होना शुरू हो जाता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने लगती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

फूड प्वाइजनिंग के घरेलू उपाय: (FOOD POISONING)

फूड प्वाइजनिंग की समस्या से बचने के लिए विशेष तौर पर भोजन बनाते समय या बनाने के स्थान को बेहद साफ रखना अति आवश्यक है। अपने हाथों को बढ़िया से साफ करके ही भोजन पकाएं या खाएं। भोजन को उचित आंच पर अच्छे से पकाएं और सदैव पके भोजन को कच्चे खाद्य पदार्थों से दूर रखें। बर्तन के स्थान को अच्छे से साफ और स्वच्छ रखें। पके भोजन को फ्रीज में रखने की कोशिश करें और इस मौसम में ज्यादा देर के बने या बासी भोजन से हमेशा दूर रहें।

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दस्त लगने का कारण (Diarrhea):

डायरिया या दस्त लगना गर्मी के मौसम में होने वाली मौसमी बीमारियों में से एक है। गर्मी के मौसम में जब हम बाहर रखे भोजन को खा लेते है जिससे डायरिया होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके पहचाने जाने के लक्षण जैसे पतला दस्त और दिन में तीन बार से ज्यादा होने पर शरीर में पानी की कमी होने लगती है जिससे हमे पेट में ऐंठन और कमजोरी हो जाती है, साथ ही सिर दर्द की समस्या भी हो जाती है।

डायरिया से बचने के उपाय (Diarrhea):

इससे बचने के उपायों में दवाओं के अलावा पानी को खौलाकर या गर्म करके ही पिए जिससे पानी में मौजूद बैक्टीरिया समाप्त हो जाएं और कोशिश करें की ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन किया जा सके। फल और सब्जियों को अच्छी तरह से साफ करके ही इस्तेमाल में लाए। इसके अलावा पानी में नमक, चीनी और नींबू का सेवन करें जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलेट की कमी न हो।

आंख आना क्या है? (Conjunctivitis):

गर्मी में आंख आने का मतलब conjunctivitis होता है, जिसमे आंख के सफेद भाग का लाल हो जाना, लगातार पानी आने के साथ पलको में सूजन होना होता है। इससे आंखों में दर्द, जलन के साथ चुभन भी होती है। इस दौरान सोकर उठने के वक्त आंखें पूरी तरह खुल नही पाती है। ये एक तरह के बैक्टीरिया जनित बीमारी है जो 3 से चार दिन तक रहती है।

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Conjunctivitis से कैसे बचें?

आंख आने के कारणों में से एक मुख्य कारण बैक्टीरिया है, जब हम किसी और के रुमाल या तौलिया का इस्तेमाल कर लेते है। हमें सदैव साफ रुमाल से ही अपने आंखों की सफाई करनी चाहिए, इस दौरान आंखों को हाथ से न रगड़ें या छुएं। तेज धूप में जाने से बचे साथ ही काले चश्मे का उपयोग करें। अपने हाथों को सदैव साबुन से धोकर साफ रखें।

पीलिया के लक्षण (Jaundice):

Jaundice जिसे आम तौर पर पीलिया कहा जाता है ये एक लीवर से जुड़ी हुई बीमारी है जिसे हेपेटाइटिस बिलिरुबिन कहा जाता है। जब त्वचा के साथ आंखों का सफेद भाग पीला पड़ने लगे तो समझ जाना चाहिए पीलिया का असर है। इसके अलावा अन्य समस्याएं जैसे भूख नहीं लगना, सिरदर्द, कब्ज, कमजोरी पेट दर्द, पतली और भूरे रंग का दस्त होना पीलिया के मुख्य लक्षण है। इसका इलाज समय रहते कराना आवश्यक है नही तो ये जानलेवा भी साबित हो सकती है।

पीलिया से बचने के घरेलू उपाय:

पीलिया हो जाने पर अतिसीघ्र चिकित्सक से परामर्श लें, और भोजन में तली हुई चीजें और मसालों से बनी सब्जी वगैरह न खाएं, मदिरा का सेवन वर्जित है इसलिए इसे दूरी बना कर रखें। स्वच्छ पानी का हो सेवन करें और हल्के व्यायाम के साथ आराम भी करें।

FAQ-

Q- डेंगू कैसे होता है?

ANS- डेंगू बीमारी मच्छर के काटने से होता है, और ये मच्छर दिन में काटते हैं।

Q- पीलिया के लक्षण क्या है?

ANS- जब आपकी त्वचा और आंखों के सफेद भाग का रंग सफेद से ज्यादा पीला नजर आने लगे तो ये पीलिया के प्रारंभिक लक्षणों में से एक हैं।

Q- लू लगने पर क्या करें?

ANS- लू लगने पर पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें और धूप में निकलने से बचें।

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