गुरु नानक | Guru Nanak Jayanti | गुरु नानक का जीवन परिचय

गुरु नानक जयंती ( 2021 में गुरु जयंती कब है, दोहे, उपदेश, शिक्षाएं, फोटो, गुर परब, गुरु ग्रंथ साहिब, करतारपुर साहेब)

गुरु नानक देव सिक्खों के प्रथम गुरु थे, जिन्होंने अपने उपदेशों से जन मानस में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करने का काम किया था। गुरु नानक देव जी मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते थे, उनके उपदेशों और शिक्षाओं में एक नाम जो ईश्वर है उसका नाम जपने को कहा करते थे। तो आइए जानते है गुरु नानक जयंती यानी गुर परब को –

गुरु नानक देव जी की जन्म कथा

गुरु नानक देव का जन्म रावी नदी के किनारे बसे एक ग्राम तलवंडी (अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित) में कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को एक पंजाबी खत्री परिवार में हुआ था। जो दीपावली के 15 दिन बाद पड़ता है। तलवंडी को ननकाना साहेब भी कहा जाता है। इनके पिता का नाम मेहता कालू चंद खत्री था और गुरु नानक की माता का नाम तृप्ता था। ये अपनी माता पिता की दो संतानों में बड़े थे और इनकी एक बहन थीं, जिनका नाम नानकी था।

गुरु नानक देव की जीवनी

गुरु नानक बचपन से ही प्रखर बुद्धि के धनी थे, लेकिन इनका मन सामान्य पठन पाठन में नहीं लगता था। इनके पिता जी ने इन्हे विद्या अध्धयन के लिए गुरु के पास भेजा, जहां ये अपने गुरुओं से ही सामान्य अध्धयन को छोड़कर भगवत प्राप्ति से संबंधित प्रश्नों के उत्तर पूछते रहते।

जिससे परेशान होकर इनके गुरु ने इन्हे पिता के घर पर पहुंचा दिया। अब इनका मन सांसारिक गतिविधियों से दूर रहने लगा। बालक नानक की बातों को सुनकर हर कोई हतप्रभ रह जाता की आखिर ये छोटा सा बालक इतना ज्ञानी कैसे हो सकता है।

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बालक नानक के तर्कों और उपदेशों से जन मानस में श्रद्धा उत्पन्न होने लगी और लोग इनमे अलौकिक शक्तियों का आभास करने लगे। बचपन से नानक देव के प्रति श्रद्धा भाव रखने वालों में प्रमुख नाम इनकी बहन नानकी का भी आता है।

गुरु नानक जयंती
गुरु नानक फोटो

गुरु नानक देव का विवाह

गुरु नानक के पिता श्री मेहता कालूचंद खत्री और माता तृप्ता देवी ने इनका विवाह नजदीक ग्राम के सुलखनी नामक युवती से करा दिया। जिससे इनका मन संसार परिवार में लगे। विवाह के समय नानक देव की आयु 16 वर्ष की थी। लेकिन ये विवाह के उपरांत भी धार्मिक गति विधियों में व्यस्त रहते थे।

32 वर्ष की आयु में इनको प्रथम पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम श्री चंद रखा गया। दूसरी संतान के रूप में पुत्र हुए जिनका नाम लखमीदास रखा गया। 1507 ईस्वी में नानक देव ने पत्नी और पुत्रों को अपने ससुर के पास पहुचाकर तीर्थाटन के लिए निकल पड़े। इनके साथ चार साथी भी थे जिनका नाम क्रमशः मरदान, लहना, बाला और रामदास था।

गुरु नानक ने तीर्थाटन करते करते भारत, वर्मा, अफगानिस्तान तक की यात्राएं की और अपने उपदेशों से लोगो के जीवन में प्रकाश भरने का कार्य किया। इनके दोहे जनमानस के काम आने वाले है।

गुरु नानक की वाणी

गुरु नानक के उपदेश जो समाज की भलाई के काम आते हैं। उनके उपदेशों में से कुछ दोहे यहां दिए जा रहे है।

1- दीन दयाल सदा दुख भजन, ता सीऊ रुचि न बढ़ाई।

नानक कहत जगत सभ मिथिया, ज्यों सुपना रैनाई।।

2- जगत में झूठी देखी प्रीत। 

अपने ही सुखासो सब लागे, क्या दारा क्या गीत।।

3- हरि बीन तेरो को न सहाई। 

काकी, मात – पिता सूत बनीता, को काहू को भाई।।

4- धनु धरनी अरु संपति सगरी, जो मानिओ अपनाई।

तन छुटै कुछ संग न चालै, कहा ताहि लपटाई।।

5- मेरो मेरो सभी कहत है, हित सो बाध्यों चीत।

अंत काल संगी न काऊ, यह अचरज की रीत।।

6- एक ओंकार सतनाम, करता पुरभऊ निर्भाऊ।

निरबैर, अकाल मुरती, अजुनि सभ गुर प्रसादि।।

गुरु नानक किसके समकालीन थे।

गुरु नानक देव के समय भारत में इब्राहिम लोदी का शासन था, जो कि एक तानाशाह था। तब यहां के हिंदू मुस्लिम एक साथ रहते थे लेकिन ये इब्राहिम लोदी को कतई पसंद नहीं था। वो दोनो वर्गों में लड़ाइयां करवाता रहता था। तब गुरुनानक के उपदेशों और भाई चारा के साथ रहने के उपदेशों से उसने उन्हें जेल में डलवा दिया।

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तभी मुगल बादशाह बाबर ने इब्राहिम लोदी पर चढ़ाई शुरू कर दिया और उसे युद्ध में परास्त कर अपना शासन स्थापित किया। चुकि बाबर एक विदेशी अक्रांता के साथ चतुर शासक भी था। उसने तत्काल गुरु नानक देव जी को जेल से रिहा कर दिया।

गुरु नानक देव का संक्षिप्त परिचय

जन्म15 अप्रैल 1469(कुछ विद्वानों के मतानुसार)
कार्तिक पूर्णिमा के दिन
जन्मस्थान तलवंडी (अब पाकिस्तान में)
मृत्यु/मृत्यु स्थान22 सितंबर 1539 को,करतारपुर साहेब(अब पाकिस्तान में)
पिता का नाममेहता कालू चंद खत्री
माता का नामतृप्ता देवी
बहन/भाईइकलौती बहन नानकी
पत्नी सुलखनी
संतान2 पुत्र श्रीचंद और लखमीदास
पहचानप्रथम सिक्ख गुरु
प्रमुख रचनाएंगुरु ग्रंथ साहिब, गुर बाणी
शिष्यों के नाममरदाना, लहना, बाला और रामदास
उत्तराधिकारीलहना, बाद में गुरु अंगद देव

गुरु नानक की कहानी

एक बार गुरु नानक काबा ( मुस्लिमों का पवित्र स्थल) की तरफ पैर करके सो रहे थे, तो कुछ लोगों ने नानक देव का विरोध किया। तो उन्होंने कहा – कि जिस दिशा में काबा न पड़ता हो उधर मेरा पैर कर दो, लोगों ने नानक देव को उठा के दूसरी दिशा में कर दिया। जिस दिशा में उनका पैर होता, काबा उसी दिशा में नजर आता। ऐसा देख लोग नतमस्तक हो गए और क्षमा प्रार्थना करने लगे।

लोग भी समझ गए कि गुरु नानक देव कोई सामान्य इंसान नही है। लोग उनकी कही शिक्षाओं और उपदेशों का गंभीरता पूर्वक श्रवण करते थे। गुरु देव ने लोगों से एक नाम सतनाम का नाम जप करने की शिक्षा दी, नानक देव सर्वेस्वरवादी थे, मतलब उनके लिए हर एक व्यक्ति किसी जाति, धर्म, मत और संप्रदाय से अलग एक परिवार की तरह था।

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गुरु नानक की पुण्य तिथि कब है।

गुरु नानक देव की मृत्यु 22 सितंबर 1539 को करतारपुर ( अब पाकिस्तान) में हुई थी। करतारपुर को नानक देव ने ही बसाया था, जहा पर कई धर्मशालाएं भी बनवाई थी। उनका आखिरी समय भी करतारपुर में ही बीता, इस दौरान नानक देव जनमानस में बहुत लोकप्रिय हुआ करते थे।

करतारपुर साहिब सिक्खों का पवित्र स्थल है, जहां पर प्रत्येक वर्ष गुरु नानक देव की जयंती पर मेला लगता है और भारत के साथ विदेशों से भी सिक्ख समुदाय के लोग लाखों की संख्या में करतारपुर साहिब आकर अपने को धन्य समझते है।

गुरु नानक जयंती क्यों मनाई जाती है।

सिक्खों के प्रथम गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसी उपलक्ष्य में इस दिन को गुर परब या गुरु नानक जयंती के रूप में मनाते हैं। हालांकि कुछ विद्वान

नानक देव का जन्म 15 अप्रैल 1469 को मानते है।

लेकिन ज्यादातर लोग गुरु नानक जयंती दीपावली के पंद्रह दिन बाद पड़नेवाले कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही मनाते हैं। ये दिन सिक्ख समुदाय के लिए एक विशेष दिन होता है।

FAQ-

Que.1- गुरु नानक जयंती क्यों मनाई जाती है ?

Ans.- कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही गुरु नानक देव का जन्म हुआ था, उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गुरुनानक जयंती मनाई जाती है।

Que.2- 2021 में गुरु नानक जयंती कब है ?

Ans.- 2021 में गुरु नानक जयंती 19 नवंबर 2021 को है।

Que.3- गुरु नानक का जन्म कहां हुआ था ?

Ans.- गुरु देव का जन्म तलवंडी नामक ग्राम में हुआ था जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है।

Que.4- नानक देव के माता पिता का क्या नाम था ?

Ans.- इनके पिता जी का नाम श्री मेहता कालूचंद खत्री और माता का नाम तृप्ता देवी था।

Que.5- गुरु ग्रंथ साहिब की रचना किसने की थी ?

Ans.- गुरु ग्रंथ साहिब की रचना प्रथम सिख गुरु श्री गुरु नानक देव जी ने की थी।

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